MANUSCRIPTS

अरबी

कुछ अरबी संग्रहों को अरबी सुल£ो के क्षेत्र में हाथ के काम के टुकड़ों को सबसे पुराना समझा जाता है उनमें से 7वीं शताब्दी ई.(661) में चर्मपत्र पर पुर्व कुफिक लिपि में लि£ा क़ुरान जिसका श्रेय जनाब हज़रत अली को जाता हैं ! 8 वीं शताब्दी में का़ग़्ाज़ पर लि£ा पवित्र कु़रान का एक और नमूना जिस के हस्त ले£ का श्रेय इमाम ज़फर को दिया जाता है! 9वीं शताब्दी के चर्मपत्र पर लि£े क़ुरान शरीफ का एक नमुना जिसका श्रेय इमाम अबुल हसन मुसा को दिया जाता हैं! प्रख्यात विद्वान और सुले£क 'इब्नमुकला जिन्होने प्रघानमंत्री के रूप में बगदाद के तीन £लीफाओं की सेवा की और 20 जुलाई 941ई. में उनकी मृत्यु हो गयी थी! 10वीं शताब्दी में पूर्व नक्श शैली में क़ुरान लि£ा रज़ा पुस्तकालय के संग्रह में इस विश्ोष कृति ने एक महत्व पूर्ण स्थान प्राप्त किया है! विख्यात सुले£क ने अरबी अक्षरों को पुन:आकार दिया जो कि उस समय एक अन्य रूप में प्रचलन में था! वास्तव में दुनिया में 'इब्नमुकला के लेखन का एक अद्वितीय नमूना हैं! पुस्तकालय में13 वीं शताब्दी ई. के बगदाद के प्रवीण ले£क 'याकूत-अल-मुस्ता के द्वारा लि£े क़ुरान की प्रति है! यह सोने और कीमती लाजवर्द पत्थर रंग मे अलंकरित हुए है! अरबी पांडुलिपि की एक अन्य प्रवीण रचना 'दीवान-अल-हादिरा दिनांकित 629 हिजरी (1221ई.) समान प्रतिभाशाली सुले£क द्वारा रचित है! यह एक बार बीजापुर के सुल्तान इब्राहिम आदिलशाह के शाही पुस्तकालय का हिस्सा था! अरबी का छदम भ्ूागोल और अद्धत रचनायें, मनुष्यों की अजीब तस्वीरें पशुओं और चिडि़यों के उदार सचित्रों के साथ शीर्षक अजायबुल म£लुकात, ज़कारिया बिन महमूद अल क़ाज़वानी (हिजरी6821283ई.) द्वारा लि£ति, इब्न कमाल उददीन हुसैन ने 929 हिजरी (1571ई.) में सुरूचि पूर्ण नक्श में लि£ा! अरबी पांडुलिपि 'शारहल-काफिया आफ रज़ी भी पुस्तकालय की एक अद्वितीय सम्पति हैं! यह सम्राट शाहजहाँ के प्रघानमंत्री नवाब साद उल्ला £ान द्वारा हाशिये पर सकेंतिक है! इस पांड़ुलिपि शाहजहाँ के अपने हाथ सें लि£ी टिप्पणी और साद उल्ला £ान, इनायत £ान, इतिमाद £ान, मुहम्मद सालिह £ान, औरंगज़ेब और आलमगीर आदि की मुहर और हस्ताक्षर भी शामिल हैं!
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Persian

'ज़खरिई खवारिज़्म शाही पुस्तकालय की पांडुलिपियों के बीच प्रारमिभक गन्थ दवाओं पर हैं यह (डी.531हिजरी) जैन उददीन इब्राहिम गुरगनी द्वारा लिपिक हैं एक अन्य 'तफसीर-ए-तबारी का अनुवाद अब्दुल बक़ी ने अरबी में किया और मिर्ज़ा मोहम्मद बिन मुजताहिद ने लिा12वीं शताब्दी के आकड़े हैं! इसमें ईरान के शाह अबदस और कासिम बेग खान दिनाकिंत 1031 हिजरी (1621-22ई.) के हस्ताक्षर निहित हैं! रशिदुद-दीन-फ़ैज़ उल्ला द्वारा शीर्षक 'जमीउल तवारीख मंगोल जनजाति के इतिहास पर प्रारमिभक सचित्र फारसी काम, मंगोलों के राजनीतिक सामाजिक, और घार्मिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते दुर्लभ लघु चित्र शामिल हैं! इन चित्रों से चीनी और मघ्य एशिया के प्रारमिभक चित्रों के प्रेरणा सकेंत मिलते हैं! जिन्होने फारस के हेरात स्कूल को प्रभावित किया!
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Sanskrit & Hindi

उल्लेखनीय संस्कृत पांडुलिपियों मे से, प्रबोघ चक्रवर्ती का व्याकरण पर कार्य का उल्लेख कर सकते है, यह बैजनाथ देव चौहान वंशी द्वारा लिखति है और गिरघारी लाल मिश्रा द्वारा लिपिक है! श्री श्रीपति भठ्ठा द्वारा लिखति ज्योतिष रत्नमाला पर एक महत्वपूर्ण लेकिन अघूरी टिप्पणी हैं! नटराजन दीपमिशादा शीर्षक से एक दिलचस्प कार्य है! नज़र (दृषिट) को तेज करने के लिए कुछ मन्त्र भी शमिल है 'महिमा स्टेचर्स एक बहुत प्रसिद्व कार्य है, टीकाकार मघुसूदन सरस्वती के साथ पुष्पा दत्ता द्वारा साथ में टिप्पणी संकलित हैं!
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Urdu

संग्रह में अरबी और फारसी की तुलना में उर्दू पांडुलिपियों की संख्या कम है! पुस्तकालय में शाह हातिम का दीवान कुलियत-ए-मीर, जुरात, हसन, दीवान-ए-सोज़, और दीवान-ए-ग़ालिब की बहुत महत्वपूर्ण पांडुलिपि जिस में ग़ालिब की लिखावट में सुघार और संशोधन शमिल है! इंशा रानी केतकी की कहानी की दो दुर्लभ प्रतियाँ हैं! प्रख्यात कवि युसुफ अली खान 'नाजिम का दीवान जिसमें रामपुर के शासक अत्यघिक सोने से अंलकृत है! इसमें नवाब का चित्र भी शमिल है!
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Turkish

तुर्की भाषा में प्रारमिभक मुग़लों और दिल्ली के सुल्तानों के समय में भारतीय राजनीति पर उल्लेखनीय प्रभाव निहित है! तुर्की के कर्इ शब्द आमतौर पर हिन्दी उर्दू और अन्य भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में प्रयोग किये जाते थे! मुग़ल सम्राट बाबर एक विपुल लेखक और तुर्को-उज़्बेक भाषा का कवि था और गदय व पदय दोनो में एक खास शेली के रूप में स्वीकार कर लिया गया था!
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Palm-leaf

रामपुर रज़ा पुस्तकालय में उनकी मूल्यवान सम्पतित के रूप में कई ताड़ (खजुर) के पत्तों पर पांडुलिपिया है उनमें से कई तेलगू, संस्कृत, कन्नड़, सिनहाली और तमिल भाषा में है! वे सब आमतौर पर स्वरूप से घार्मिक है! एक तमिल लिपि पर चित्रों, प्रतिमा और पूजा की विघियों के नियमों का उल्लेख है! एक अन्य पत्ता पांडुलिपि कई जड़ी बूटियो के औषघि गुणों के बारे में जानकारी देती है जो बीमारियां ठीक करती है! संस्कृत भाषा में एक ऐसा ही ग्रन्थ हस्तलिपि में लिखा है जिसमें महत्वपूर्ण महाकाव्य रामायण है यह रामायण की बह्मावाचाकम की प्रशंसा करता है! कन्नड़ पांडुलिपि में संगीत पर एक निबन्घ है अभी तक अन्य पांडुलिपि पर वैष्णव भजन 'पीरियाटाइन वायमोटी है
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Pushto

रज़ा पुस्तकालय अन्य प्राच्य भारतीय पुस्तकालयो की जोत की तुलना में अपने दुर्लभ पशतो पांडुलिपियों और मुदि्रत पुस्तकों के लिए प्रतिषिठत है, पुस्तकालय में पशतो में क़ुरान शरीफ पर व्याख्या है और अन्य दो दुर्लभ खण्डों में खुशहल खान खाटक का दीवान है! जो कि नासटालिक अक्षरों में सोने के साथ विशालता से सजाया गया है!
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